खुशियों से भर दे जिंदगी हमारी


सिसवा बाज़ार/समाचार


प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय सिसवा बाजार शाखा की ओर से आयोजित नौ दिवसीय अलविदा तनाव शिविर के सातवें दिन बहन कुमारी पूनम ने कहा कि आज सभी भाई बहनों माताओं ने अलौकिक जन्मोत्सव खूब धूमधाम से मनाया गया। श्री राम जानकी मंदिर के प्रांगण में आयोजित अलविदा तनाव कार्यक्रम के ब्रह्मकुमारी पूनम बहन ने कहा कि आज पंडाल में स्वर्ग जैसा माहौल बन गया और सभी को लगा कि जैसे हमें तनाव से मुक्त खुशी वाला नया जीवन निर्भय उमंग उत्साह वाला जीवन मिला सभी को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का इतिहास सुनाया गया कि इस संस्था की स्थापना सन् 1937 में सिंध हैदराबाद मैं स्वयं निराकार परमात्मा शिव के माननीय तन का आधार लेकर की गई थी। बाद में उनका नाम प्रजापिता ब्रह्मा रखा गया जिसमें 400 भाई बहनों युवाओं ने अपना जीवन समर्पित कर दिया 14 वर्षों तक साधना तपस्या में बिताया परमात्मा शिव ने ब्रह्मा बाबा को आदेश दिया कि यह संस्था भारत में भी स्थापित करे। 1950 से भारत में आए 1952 से कार्य शुरू किया तथा यह संस्थान बहनों को सौंप दिया भारत माता को शक्ति का अवतार कहा प्रथम सेवा केंद्र दिल्ली मथुरा के कंधे पर सन 1969 में ब्रह्मा बना।तथा चंद हो गए तब 150 सेवा केंद्र खुले थे आज विश्व के पांचो खंडों में 140 देशों में 9000 सेवा केंद्र खुल चुके हैं इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू है इस संस्था की मुख्य प्रशासिका दादी रतन मोहिनी जी है।तथा घर गृहस्थी में रहने वाले 10 लाख से अधिक भाई बहन इस संस्था से जुड़े हैं सेवा केंद्रों पर जो भाई-बहन निर्धारित आते हैं वही तन मन धन से सहयोगी बनते हैं सभी सेवा केंद्र हेड क्वार्टर को मदद करते हैं हेड क्वार्टर पर योग भरी शिविर से उन्नति कर रहे हैं संयुक्त राष्ट्र संघ यू एन ओ से गैर सरकारी संस्था के रूप में संबंध है तथा यूनेस्को और यूनिसेफ का भी सलाहकार सदस्य है सन 1981 से1986 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस अंतरराष्ट्रीय तथा अन्य पीस मैसेंजर अवार्ड से भी सम्मानित किया है इस कार्यक्रम में "खुशियों से भर दे जिंदगी "हमारी गीत प्रस्तुत की गई आज सभी ने एहसास किया की ईश्वरी शक्ति में हमें आनंदमय जीवन प्रदान किया।तथा नगर के सभी पत्रकार की टीम ने बहन पूनम को सम्मानित किया इस दौरान सोमा चौरसिया नीलम पम्मी बहन शिवेशवर सूरज नारायण रणधीर भाई वीरेंद्र भाई बीके मनोज पारुल दीपक रामउग्रह पारुल की किरन सहित हजारों की संख्या में महिलाएं पुरुष उपस्थित रहे।