तब्लीगी जमात के विदेशियों के ख़िलाफ़ FIR को ख़ारिज करते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने भी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रोपेगैंडा को आड़े हाथों लिया। कहा कि दिल्ली मरकज आए विदेशियों को लेकर ऐसी तस्वीर पेश की गई मानो को Covid-19 फैलाने के लिए यही ज़िम्मेदार हैं।
तब्लीगी जमात के विदेशी नागरिकों ख़िलाफ़ FIR को मुम्बई हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया और इस तरह की कार्रवाई के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त टिप्पणी की।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि राजनीतिक सत्ता महामारी के समय में बलि का बकरा बनाने की कोशिश करती है इन विदेशियों के ख़िलाफ़ यही किया गया लगता है। उन्होंने कहा अतिथि देवो भाव की महान परंपरा पर काम करने के बजाए विदेशी मेहमानों पर जुल्म किया गया। अदालत ने कहा कि हमारी सभ्यता अतिथि देवो भाव की कहावत मशहूर है, जिसका अर्थ यह है कि हमारे मेहमान भगवान जैसे हैं। मगर मौजूदा परिस्थितियों ने इसे छिन्न-भिन्न कर दिया है। क्या हम सच में उस अजीम परंपरा और सभ्यता पर अमल कर रहे!
आपको बता दे! अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा दिल्ली आने वाले विदेशियों के खिलाफ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बहुत बड़ा प्रोपेगेंडा किया गया। एक ऐसा माहौल बनाने का प्रयास हुआ जिसमें इस बात को बताया गया कि यह विदेशी कोविड-19 इंफेक्शन के जिम्मेदार हैं।_
अदालत ने यह भी कहा कि भारत में इंफेक्शन से संबंधित हालिया आंकड़ों से ज्ञात होता है कि उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। विदेशियों के खिलाफ की जाने वाली कार्यवाही की भरपाई के लिए पॉजिटिव स्टेप उठाए जाने की जरूरत है। 58 पन्नों पर आधारित फैसले में जस्टिस टीवी नलवाडे और जस्टिस एमजी सेवलिकर की डिवीजन बेंच ने कहा ऐसा मालूम होता है कि राज्य सरकार ने सियासी मजबूरी के तहत काम किया और पुलिस ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं किया।