आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं.....! 

सामान सो बरस का है पल की ख़बर नहीं...!! 

अशफाक अम्बर

बेहट (सहारनपुर)

साल 2020 राहत इंदौरी की शायरी का 51वां साल रहा,लॉकडाउन के कारण वे सोशल मीडिया के ज़रिये लगभग हर दिन अपनी बात कहते थे।

उक्त विचार न्यूज़ प्लस के संपादक ने सलमान  अय्यूबी ने एक मीटिंग में रखे।


अंतरराष्ट्रीय हिंदी व उर्दू अदब की महफ़िलो के जांबाज़ शायर राहत इंदौरी के इंतेक़ाल(निधन) पर शोक सभा का आयोजन हुआ। जिसमें सलमान अय्यूबी ने कहा कि दिल में हिंदुस्तान और शायरी में इंसानियत लिए राहत इंदौरी कल रुख़सत हो गए। जिस कोरोना से बचाव के लिए उन्होंने अपने सोशल मीडिया की तस्वीर को STAY HOME - SAVE LIVES लिखकर संदेश दिया था, उसी कोरोना ने उन्हें संभलने नहीं दिया।

ख़िराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) के साथ मायूस होकर हिंदुस्तान से उनके चाहने वालो की आंखों से ग़म के बरसते आंसू और मुंह से निकलने वाली आवाज़ चीख़-चीख़ कर कह रही है कि आज हिंदी-उर्दू के बीच का एक और मज़बूत पुल टूट गया।

सबके दिलों की आज उल्फ़त चली गई  ! 

ऐसा लगा कि बज्म से राहत  चली गई  !! 

राहत साहब की 70 साल की उम्र में यह संक्रमण उनके लिए गंभीर  मसला था। राहत साहब के किरदार से वाकिफ़ शायरों की बिरादरी को यकीन था कि इस बार कोरोना ग़लत आदमी से भिड़ गया है। लेकिन,होना कुछ और ही था। राहत साहब को निमोनिया भी हो गया था और लगातार तीन हार्ट अटैक भी आए। इसके बाद शाम 5 बजे  खबर आई कि रूह को राहत देने वाला ये शायर दुनिया से चला गया ।

मैं अपनी मुट्ठीयो में क़ैद कर लेता ज़मीनों को  !!

मगर मेरे क़बीलों को बिखर जाने की जल्दी थी  !! 

डॉ. राहत इंदौरी का पार्थिव शरीर अस्पताल से कब्रिस्तान ले जाया गया। 20 लोगों को जनाज़े की नमाज़ की अनुमति मिली। राहत साहब को सुपुर्दे ख़ाक किया गया।

मुफ़लिसी में गुज़रा मेरा बचपन,,,! 

परिवार को भी मेरे जनाज़े से दूर होना पड़ा,,,!! 

इसी तरह बज़्म ए निदाए उर्दू के जनरल सेक्रेटरी प्रसिद्ध शायर डॉ० साबिर बेहटवी ने कहा कि उर्दू अदब की कद्दावर शख्सियत थे। राहत इंदौरी

जब वो डूबकर अपने शेर पढ़ते थे तो हज़ारों लोगों का मजमा दीवाना-सा हो उठता था। एक वक़्त ऐसा था जब बाबरी मस्जिद पर अंतिम फैसला सुनाये जाने वाला था उस वक़्त उनके शेर हिंदुस्तान के लोगो की ज़बानों से बयां हो रहे थे। और नागरिकता क़ानून बिल के विरोध के दौर में उनके शेर सड़कों पर दहाड़ रहे थे। जिन्होंने उन्हें देखा तक नहीं,सुना तक नहीं वो उनके शेर पोस्टर व बैनर पर लिखकर आवाज़ बुलंद कर रहे थे। लोगों ने ये सब अपनी आंखों से देखा है, वो तो यही कहेंगे कि राहत साहब की असल जगह फिल्मी संगीतकार का दरबार नहीं मुशायरे का मंच था। मगर अफ़सोस कि कोरोना काल में एक और सितारा इस दुनिया को छोड़कर चला गया है। उन्होंने कहा कि में राहत इंदौरी साहब से दादरी मैराथन मुशायरे में मिला था राहत साहब ने मुझे ढेरों दुआओं से नवाजा था।राहत इंदौरी साहब ताउम्र आपकी शायरी लोगो के दिलो में शमशीर बनकर चमकती रहेगी।

इस अवसर पर तारिक  अजीजी सुफियान अन्सारी  उसमान अय्यूबी जकरिया  अजीजी  अतहर अय्यूबी मुकर्रम चौधरी आदि लोगों ने स्वर्गीय राहत इंदौरी को खिराजे अक़ीदत पेश कर मग़फ़िरत की दुआ की।