ऑनलाइन क्लास में शामिल नहीं हो सकी तो छात्रा ने खुद को लगाई आग, पिता ने कहा- घर में इंटरनेट कनेक्शन वाला मोबाइल नहीं है 


ऑनलाइन-डिजिटल टाइप आधुनिक मादक शब्दों के दीवानों के लिए और उनके लिए भी जो एक गर्भवती हथिनी की दुखदाई और जघन्य हत्या के लिए शोकाकुल हैं ,उनके लिए भी जो चंद आपराधिक मामलों पर सेलेक्टेड तरीके से अपना आक्रोश व्यक्त करते हैं लेकिन शासन-प्रशासन की आपराधिक कार्यवाहियों पर घनघोर चुप्पी साध जातें हैं...
▶लड़की ने आत्महत्या कर ली,वह नौवीं पास करके हाल ही में दसवीं कक्षा मे आई थी.
▶लड़की का स्कूल लॉकडाउन की वजह से बंद था.
▶सरकार ने ऑनलाइन कक्षा की शुरुआत की थी.
▶ लड़की उस ऑनलाइन कक्षा में शामिल नहीं हो सकी थी.
▶ लड़की के घर में टीवी था, जो खराब पड़ा था, स्मार्टफोन नहीं था.
▶ लड़की के दिहाड़ी मजदूर पिता के पास लॉकडाउन में कोई रोजगार नहीं है.
▶ लड़की पढ़ने में तेज थी, लेकिन ऑनलाइन क्लास नहीं अटेंड कर सकी.
▶ लड़की को लगा कि अब ऐसे ही ऑनलाइन क्लास होगी.
▶ लड़की के पास कंप्यूटर या स्मार्टफोन नहीं था.
▶ लड़की को लगा कि अब उसकी क्लास ही नहीं,पढ़ाई भी छूट जाएगी.
▶ फिर लड़की ने आत्महत्या कर ली😭😭😭
▶ यह कोरोना से कामयाबी से लड़ने वाले केरल के मलप्पुरम की 'कहानी' है!😢😢😢
🔷दरअसल देश भर में सरकारों ने जिस वजह से नियमित स्कूलों को खत्म करने की ओर कदम बढ़ाया है और 'ऑनलाइन शिक्षा' का दामन थामा है, उसका असली मकसद और हासिल यही है!
🔷 आप देखिएगा... फिलहाल तकनीकी संसाधनों तक पहुंच, गरीब परिवारों की माली हालत और जागरूकता का जो आलम है, उसमें यह 'ऑनलाइन शिक्षा' देश की दलित-पिछड़ी-आदिवासी और मुस्लिम आबादी के ज्यादातर हिस्से को समूची शिक्षा के दायरे से बाहर कर देगी। यह इन तबकों को सत्ता के हर केंद्र से बाहर करने का हथियार साबित होगा।
🔷हां इन तबकों के लोगों को मुफ्त के मजदूर या एक्सपेरिमेंट के लिए कीड़े-मकोड़े की जिंदगी का मेरिट बख़्शने में कोई कमी नहीं की जाएगी..!
🔷 आर्थिक और शैक्षिक रूप से कमजोर लोग गुलामी के लिए आसानी से मुहैया हो जाते हैं ।
🔷 नौवीं में पढ़ने वाली जिस लड़की ने आत्महत्या की, वह 'दलित' थी!
(सबसे पहले यह तथ्य लिखने पर कई लोग इस पोस्ट को शायद नहीं पढ़ते। अमेरिका में बहुत सारे गोरे वहां काले लोगों की तकलीफ और गुस्से में साथ खड़े हैं!)

एडवोकेट सन्नी गौतम
समाजसेवी
सहायक सम्पादक
हिंदुस्तान Live TV