▶कोरोना की दवा के भ्रामक प्रचार के आरोप में बाबा रामदेव समेत अन्य 4 के खिलाफ केस दर्ज!


दवाई को कोरोना के गंभीर मरीजों पर टेस्ट नहीं किया गया


सिर्फ इन मरीजों पर ही किया गया था टेस्टबाबा का दवा:  69 % रिकवरी शुरुआती 3 दिन और 100 % 7 दिन में


 H. Live Tv News:  कोरोना वायरस की दवा लॉन्च करने के  बाद से बाबा रामदेव चर्चाओं में है, बाबा रामदेव के साथ साथ उनकी कंपनी पतंजलि भी विवादों  रही है,  दवा लॉन्च करने  के बाद शाम तक आयुष मंत्रालय ने इस दवा पर रोक लगा दी, 

जिससे रामदेव बाबा को एक बड़ा झटका लगा, इसके बाद से उत्तराखंड आयुष विभाग ने भी रामदेव बाबा को एक बड़ा झटका दिया। वही अब  कोरोनिल दवा को लेकर बाबा राम देव समेत चार अन्य के खिलाफ राजस्थान की राजधानी जयपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई है. 

यह केस  कोरोना वायरस की दवा के तौर पर कोरोनिल को लेकर भ्रामक प्रचार करने के आरोप में दर्ज कराया गया है. कोरोना के खिलाफ भ्रामक दवाई के प्रचार करने में बाबा रामदेव,बालकृष्ण व वैज्ञानिक अनुराग वार्ष्णेय, निम्स के अध्यक्ष डॉ. बलबीर सिंह तोमर और निदेशक डॉ. अनुराग तोमर  पर केस दर्ज किया गया है। एफआईआर आईपीसी की धारा 420 सहित विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है.


राम देव बाबा ने किया था कोरोना दवा को लॉन्च


दुनिया के कई बड़े देश कोरोना की दवा बनाने में जुटे है।  भारत में भी जोर शोर से कोरोना का इलाज खोजा जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी को भी दवा बनाने में कामयाबी नही मिली है। इसी बीच मंगलवार को योगगुरु रामदेव ने कोरोना की दवा 'दिव्य कोरोनिल टैबलट' को लॉन्च करते हुवे दावा किया कि इसके सेवन से कोरोना 7 दिन में 100 प्रतिशत ठीक हो जाएगा। सोशल मिडिया पर इस दवा का खूब प्रचार प्रसार होने लगा लेकिन शाम होते होते आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव की दवा के प्रचार प्रसार पर रोक लगा दी और पतंजलि से कोरोनिल की पूरी जानकारी मांगी है.


खुलासा:  दवाई को कोरोना के गंभीर मरीजों पर टेस्ट नहीं किया गया


पतंजलि द्वारा आयुष मंत्रालय को दी गई जानकारी में जो खुलासा हुआ है वह बेहद चौंकाने वाला है, पतंजलि ने आयुष मंत्रालय को पत्र दाखिल कर ये जानकारी दी है कि पतंजलि की इस दवाई को कोरोनावायरस से पीड़ित किसी गंभीर मरीज पर टेस्ट नहीं किया गया बल्कि सिर्फ उन लोगों पर टेस्ट किया गया है जिनमें कोरोनावायरस के बहुत मामूली लक्षण थे।  यानी कि बाबा रामदेव ने दवाई तो जोर शोर से लांच कर दी लेकिन इतनी बड़ी जानकारी छुपाई रखी और 100% मरीजों के ठीक होने का दावा भी कर डाला।


सिर्फ इन मरीजों पर ही किया गया था टेस्ट


पतंजलि ने आयुष मंत्रालय में को जो पत्र दाखिल किया है उसमें यह बताया है कि करोनिल का क्लीनिकल टेस्ट 120 ऐसे मरीजों पर किया गया है, जिनमें कोरोनावायरस के लक्ष्ण काफी कम थे।  इन मरीजों की उम्र 15 से 80 साल के बीच थी।  करोनिल दवा को कोरोना के गंभीर मरीजों पर टेस्ट नहीं किया गया था।  यह बात आयुष मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में खुद पतंजलि ने स्वीकार की है।


पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से मंत्रालय को बताया गया कि यह क्लीनिकल ट्रायल जयपुर के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च में किया गया था। पतंजलि का यह भी कहना है कि उन्होंने हर नियम का पालन किया,साथ ही आयुर्वैदिक साइंस सेंट्रल काउंसिल के डीजी को लूप में रखा था।  

इस रिपोर्ट में बताया कि दवा का पहला क्लिनिकल ट्रायल एक मरीज पर 29 मई को किया गया, इसमें 69 फीसदी  रिकवरी शुरुआती 3 दिन और 100 फ़ीसदी रिकवरी 7 दिनों में किए जाने का दावा है।
यानि बाबा रामदेव ने बिना कोरोना के गंभीर मरीजों पर कोरोनिल दवा का टेस्ट किए 100% ठीक होने का दावा ठोक दिया।